25% वोटरों तक पहुंचने के लिए भाजपा ने सेल फोन प्रमुख, कांग्रेस ने डिजिटल साथी बनाए

नई दिल्ली/ प्रियंक द्विवेदी. पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में रहने वाले भाजपा आईटी सेल के पदाधिकारी दीपक दास एक साथ 1114 वॉट्सऐप ग्रुप संभाल रहे हैं। दीपक की तरह ही राजनीतिक पार्टियों के कई ऐसे कार्यकर्ता हैं जो देशभर में वॉट्सऐप के जरिए प्रचार कर रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल हुआ था। लेकिन तब फेसबुक और ट्विटर के जरिए प्रचार का जोर ज्यादा था। इस बार वॉट्सऐप का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। अनुमान है कि भारत में 36 करोड़ वॉट्सऐप यूजर्स हैं। भास्कर प्लस ऐप ने जब इस चुनाव में वॉट्सऐप के असर की पड़ताल की तो पाया कि पन्ना प्रमुख की तर्ज पर भाजपा ने सेल फोन प्रमुख और कांग्रेस ने डिजिटल साथी बनाए हैं। दोनों दल 25% वोटरों तक वॉट्सऐप के जरिए पहुंचने की उम्मीद कर रहे हैं।

2014 का लोकसभा चुनाव ट्विटर-फेसबुक पर लड़ा गया, इस बार वॉट्सऐप इलेक्शन

2014 के आम चुनाव के बाद से ही सभी राजनीतिक पार्टियों ने सोशल मीडिया के जरिए प्रचार करने की रणनीति अपना ली थी। ‘द सेंटर फॉर इंटरनेट एंड सोसायटी’ के रिसर्चर इलोनाई हिकॉक की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल मई में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा-कांग्रेस ने तकरीबन 50 हजार वॉट्सऐप ग्रुप बनाए थे। इसके बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी वॉट्सऐप के जरिए प्रचार किया गया।

युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी (आईटी सेल) वैभव वालिया ने भास्कर प्लस ऐप को बताया कि पांचों विधानसभा चुनावों में वॉट्सऐप के जरिए प्रचार किया गया था और इसका फायदा भी हुआ। मध्यप्रदेश भाजपा आईटी सेल के प्रमुख शिवराज सिंह डाबी भी यही बात कहते हैं। दोनों का कहना है कि वॉट्सऐप के जरिए लोगों तक सीधी पहुंच बनाना आसान है।

भाजपा ने ‘सेल फोन प्रमुख’ बनाए, कांग्रेस ‘डिजिटल साथी' नियुक्त कर रही

सेल फोन प्रमुख : भाजपा ने प्रचार के लिए छह महीने पहले ही हर पोलिंग बूथ पर पन्ना प्रमुख की तरह एक-एक ‘सेल फोन प्रमुख’ की नियुक्ति की। सेल फोन प्रमुखों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे वॉट्सऐप के जरिए बूथ के लोगों से संपर्क में रहें और वीडियो, ऑडियो, ग्राफिक्स, कार्टून, मैसेज की मदद से पार्टी का प्रचार करें। भाजपा ने इसके लिए नौ लाख लोगों की टीम बनाई है।

डिजिटल साथी : पिछले साल हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के समय से ही कांग्रेस बूथ लेवल पर वोटर्स तक वॉट्सऐप के जरिए पहुंचने की कोशिश कर रही है। हर बूथ पर मौजूद वॉलंटियर्स में से 10 कार्यकर्ताओं को बूथ सहयोगी बनाया जा रहा है। इन 10 बूथ सहयोगियों में से किसी एक व्यक्ति को ‘डिजिटल साथी’ के तौर पर नियुक्त किया जा रहा है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन भी बताते हैं कि पार्टी ने कार्यकर्ताओं के लिए ‘डिजिटल साथी’ नाम से ऐप बनाया है।

वॉट्सेएप की मदद से 25% वोटरों तक कैसे पहुंचेगी भाजपा-कांग्रेस?
इस बार लोकसभा चुनाव में 90 करोड़ वोटर्स हैं। इनके लिए 10.35 लाख पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। वॉट्सऐप यूजर्स की अनुमानित संख्या 36 करोड़ है। वॉट्सऐप के जरिए भाजपा ने 9 लाख बूथ तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। अनुमान है कि कांग्रेस भी कम से कम इतने ही बूथ वॉट्सऐप के जरिए कवर कर लेगी। एक वॉट्सऐप ग्रुप से अधिकतम 256 यूजर्स जोड़े जा सकते हैं। इस तरह भाजपा-कांग्रेस को उम्मीद है कि वह 90 करोड़ में से 23 करोड़ वोटर्स तक वॉट्सऐप के जरिए पहुंच सकती है। इस तरह 25% वोटर्स तक मैसेजिंग ऐप के जरिए प्रचार किया जा सकता है।

इस बार सोशल मीडिया कैम्पेनिंग में 90% इस्तेमाल वॉट्सऐप का, लेकिन इससे फेक न्यूज फैलने का खतरा

लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान में वॉट्सेएप की क्या भूमिका है, इस बारे में जानने के लिए भास्कर प्लस ऐप ने फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट सोशल मीडिया होक्स स्लेयर के संस्थापक पंकज जैन से बात की। उनका कहना था कि इस बार सोशल मीडिया कैम्पेनिंग में 90% तक इस्तेमाल वॉट्सऐप का हो रहा है। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार डेटा काफी सस्ता हो चुका है। इसकी वजह से इंटरनेट की पहुंच बढ़ गई है।

पंकज बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में रहने वालों के लिए भी न्यूज का सोर्स वॉट्सऐप ही होता है। वॉट्सऐप पर प्रचार के जरिए पार्टियां इन लोगों तक आसानी से अपनी पहुंच बना ले रही हैं। ऐसे लोग वॉट्सऐप पर आने वाले मैसेज पढ़कर प्रभावित हो जाते हैं और दूसरों को भी प्रभावित करते हैं। हालांकि, इससे फेक न्यूज फैलने का खतरा ज्यादा है।

इस बार यूजर बेस्ड कंटेंट के जरिए प्रचार

सोशल मीडिया मार्केटिंग एक्सपर्ट सौरव जैन ने भास्कर प्लस ऐप को बताया कि वॉट्सऐप वन-टू-वन प्लेटफॉर्म है, न कि फेसबुक-ट्विटर की तरह वन-टू-मेनी प्लेटफॉर्म है। वॉट्सऐप पर आप दूसरों से वही शेयर करते हैं जो शेयर करना चाहते हैं। इस बार सोशल मीडिया कैम्पेनिंग में ब्रांड बेस्ड कंटेंट की बजाय यूजर बेस्ड कंटेंट क्रिएट किया जा रहा है ताकि प्रचार में लोगों की भूमिका बढ़ाई जा सके। इसका उदाहरण है- मैं भी चौकीदार कैम्पेन या मैं भी बेरोजगार कैम्पेन। इससे यूजर्स की सक्रियता बढ़ी है। पिछली बार ऐसा नहीं हुआ था।

सौरव का कहना है कि 2014 में देश में 20-30 करोड़ इंटरनेट यूजर्स थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 55-60 करोड़ के बीच पहुंच गई है। इनमें से ज्यादातर ऐसे यूजर्स हैं जो मोबाइल पर वॉट्सऐप का इस्तेमाल करते हैं। अगर किसी पार्टी का एक वॉलेंटियर 5 वॉट्सऐप ग्रुप में एक मैसेज भेजता है और हर ग्रुप में 200 लोग भी जुड़े हैं तो इस तरह से वह एक बार में एक मैसेज 1000 लोगों तक भेज सकता है। अब अगर इनमें से 200 लोग भी इस मैसेज को 5 लोगों को फॉरवर्ड कर दें तो मैसेज 1000 और लोगों तक पहुंच जाएगा। इस तरह एक मैसेज को 1000 लोगों के जरिए 1000 और लोगों तक पहुंचाना ज्यादा आसान है।

सौरव के मुताबिक, एक और फर्क यह आया है कि फेसबुक पर अब ऐसा कंटेंट ज्यादा देर तक नहीं रहता जिससे चुनाव के प्रभावित होने की आशंका हो। फेसबुक पर प्रचार के लिए पैसा भी खर्च करना होता है और उसकी जानकारी बतानी होती है। उम्मीदवार इस खर्च की जानकारी देने से बचना चाहते हैं। इसलिए वे प्रचार के लिए वॉट्सऐप का इस्तेमाल करते हैं।

वॉट्सऐप पर प्रचार : राष्ट्रीय स्तर से बूथ प्रमुख तक पहुंचते हैं मैसेज
वॉट्सऐप के जरिए प्रचार करने वालों को राष्ट्रीय स्तर से मैसेज आता है, जिसे राज्यों के आईटी प्रमुख तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद राज्यों के प्रमुख इस मैसेज को जिला प्रमुख, मंडल प्रमुख या बूथ प्रमुख तक पहुंचाते हैं। वॉट्सऐप पर वही कंटेंट वायरल किया जाता है जो फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर होता है।

ब्राजील : बोलसोनारो ने वॉट्सऐप पर जमकर प्रचार किया और राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया

ब्राजील में अक्टूबर 2018 में राष्ट्रपति चुनाव हुए थे। इसमें दक्षिणपंथी नेता जेयर बोलसोनारो को 56% वोट मिले और वे राष्ट्रपति बने। उनके विरोधी फर्नांडो हद्दाद को 44% वोट मिले। बोलसोनारो ने वॉट्सऐप पर जमकर प्रचार किया था और उनके प्रचार की तुलना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रचार से भी की गई थी।

ब्राजील की 66% आबादी इंटरनेट से जुड़ी है। इनमें से 90% लोग वॉट्सऐप इस्तेमाल करते हैं। ब्राजील के पहले चरण की वोटिंग से पहले एक सर्वे हुआ था। इसमें सामने आया कि बोलसोनारो के 81% समर्थक सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं, जबकि 61% समर्थक वॉट्सऐप पर उनसे जुड़ी खबरें पढ़ते हैं और 40% इसे शेयर भी करते हैं। माना गया कि इससे बोलसोनारो को चुनाव जीतने में मदद मिली।

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